- जेसी बोस विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्रथम वर्ष के छात्र दक्ष ने दीनदयाल उपाध्याय विंग की छठी मंजिल पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

मृतक के जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में उसने आत्महत्या करने के लिए खुद को ही दोषी ठहराया है। अपने माता-पिता की प्रशंसा की है। इसी विश्वविद्यालय में 18 दिन पहले भी बीटेक अंतिम वर्ष की छात्रा वंशिका ने छात्रावास में फंदा लगाकर आत्महत्या की थी।
ताजा मामले में मूलरूप से हिसार जिले के बांस गांव के रहने वाले विनोद मोर अपने परिवार के साथ एसी नगर में रहते हैं। वह निजी कारखाने में नौकरी करते हैं। बेटी सहित दो बच्चों में बेटा दक्ष जेसी बोस विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय वाइएमसीए जीव विज्ञान के प्रथम वर्ष में पढ़ता था।
दक्ष बृहस्पतिवार को तीन बजे विश्वविद्यालय परिसर में दीनदयाल उपाध्याय विंग की छठी मंजिल पर चढ़ गया और पंखे के फंदा से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह जानकारी सबसे पहले वहां पर काम करने वाले कामगारों को मिली। कामगारों ने इसके बारे में विश्वविद्यालय प्रबंधन को बताया।
वहीं, प्रबंधन ने इस घटना के बारे में थाना सेक्टर-आठ पुलिस को सूचना दे दी। सूचना के बाद थाना प्रभारी दिलबाग सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक को नीचे उतारा। पिता विनोद कुमार मोर को सूचना देकर मौके पर बुलाया। दक्ष की पीठ पर उसका बैग लटका हुआ था और उसके जेब से एक सुसाइड नोट मिला।
थाना प्रभारी दिलबाग ने बताया कि मृतक ने सुसाइड नोट में आत्महत्या करने के लिए स्वयं को जिम्मेवार ठहराया है। अपने माता-पिता को बहुत अच्छा बताया है। थाना प्रभारी ने फारेंसिक लैब की टीम को बुलाकर मृतक को कार्रवाई करके पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम होगा।
एक छात्रा ने 10 अगस्त को छात्रावास में फांसी लगाकर की थी आत्महत्या
रेवाड़ी जिला के मोतला खुर्द गांव की रहने वाली बीटेक तृतीय वर्ष की छात्रा वंशिका ने अपने छात्रावास में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी आत्महत्या के लिए स्वजन ने पड़ोसी गांव के रहने वाले सौरभ नाम के छात्र को दोषी ठहराया था। पुलिस इस मामले में मृतक के लैपटॉप और उसके मोबाइल को भी ले चुकी है और जांच चल रही है।
उधर, 18 दिन में आत्महत्या का दूसरा मामला होने पर विश्वविद्यालय के पीआरओ जितेंद्र यादव ने दुख व्यक्त किया। काउंसिलिंग के विषय पर पीआरओ ने कहा कि हमारा पहले से ही एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों के साथ अनुबंध है और उनकी ओर से नियमित रूप से छात्रों के साथ संवाद कर उनकी परेशानियों को जानकर उन्हें कैसे दूर करना है, इस बारे में सुझाव दिए जाते हैं। आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। किसी छात्र को कोई समस्या है तो अपने अभिभावकों व शिक्षकों को जरूर बताएं। हर मुश्किल घड़ी से निकला जा सकता है।
अभी तक पुलिस इस मामले किसी निष्कर्ष पर भी नहीं पहुंची की दक्ष ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे विश्वविद्यालय प्रबंधन और छात्र काफी आहत हैं।
